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जमशेदपुर: शांति हरि टावर में हुए लोगों की मौत का ज़िम्मेदार कौन ? छत पर मोबाइल टावर, बेसमेंट में दुकानें क्यों ?

अवैध मोबाइल टावर, फायर सेफ्टी पर सवाल और विभागीय मिलीभगत के आरोप

जमशेदपुर | बिष्टुपुर

जमशेदपुर के पॉश इलाके बिष्टुपुर स्थित शांति हरि टावर एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। स्थानीय निवासियों ने बिल्डिंग के प्रमोटर नरेश काउंटिया और उनके स्टाफ रामनाथ सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि बिल्डिंग की छत पर बिना आवश्यक अनुमति के कई मोबाइल टावर और भारी क्षमता वाले जनरेटर लगाए गए हैं।

स्थानीय लोगों का दावा है कि इन मोबाइल टावरों के संचालन के लिए न तो JNAC (जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमिटी) से वैध अनुमति ली गई है और न ही फायर सेफ्टी विभाग से NOC प्राप्त किया गया है। निवासियों का कहना है कि टावरों से निकलने वाले रेडिएशन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण बिल्डिंग में रहने वाले कई लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हुए हैं। कुछ लोगों ने तो यहां तक आरोप लगाया कि बीते वर्षों में कैंसर से हुई मौतों के पीछे भी इन टावरों की भूमिका हो सकती है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

“शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं”

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रमोटर नरेश काउंटिया से मोबाइल टावर हटाने की मांग की, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। लोगों का कहना है कि “दबंगई” के कारण कोई खुलकर विरोध नहीं कर पा रहा।

मामला यहीं खत्म नहीं होता। बताया जा रहा है कि इसी बिल्डिंग के बेसमेंट में बने कमर्शियल ऑफिस को करीब एक साल पहले JNAC द्वारा सील भी किया गया था। इसके बावजूद टावरों का संचालन लगातार जारी है।

JUSCO पर भी गंभीर सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि टावर संचालन के लिए Tata Steel UISL (पूर्व JUSCO) से कमर्शियल बिजली कनेक्शन कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आवेदन में बेसमेंट के “दो हॉल रूम” के लिए कमर्शियल कनेक्शन मांगा गया था, जबकि बिल्डिंग के नक्शे में बेसमेंट पार्किंग दर्शाया गया है।

अब सवाल यह उठता है कि यदि बेसमेंट पार्किंग के लिए स्वीकृत था, तो बिना जांच के कमर्शियल बिजली कनेक्शन कैसे जारी कर दिया गया?

स्थानीय लोगों के अनुसार जब वे JUSCO कार्यालय शिकायत लेकर पहुंचे तो उन्हें कहा गया कि “JNAC यदि लिखित आदेश देगा तभी कनेक्शन काटा जाएगा।” वहीं JNAC का कथित जवाब था कि वे अतिक्रमण या विवादित निर्माण के मामले में बिजली काटने का आदेश नहीं दे सकते।

विभागीय मिलीभगत के आरोप

निवासियों ने JNAC और JUSCO अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद आज तक न तो मोबाइल टावर हटाए गए और न ही कमर्शियल कनेक्शन पर कोई कार्रवाई हुई।

बड़े सवाल

•⁠ ⁠क्या बिना फायर NOC के मोबाइल टावर चलाए जा सकते हैं?
•⁠ ⁠क्या रिहायशी बिल्डिंग में भारी जनरेटर और टावर लगाना नियमों के खिलाफ नहीं?
•⁠ ⁠बेसमेंट पार्किंग को कमर्शियल उपयोग में बदलने की अनुमति किसने दी?
•⁠ ⁠आखिर शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, JNAC और संबंधित विभाग इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल नियम उल्लंघन का नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और जीवन से जुड़े गंभीर सवालों का बन सकता है

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