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ट्विशा शर्मा मौत मामलाः नोएडा पहुंची सीबीआई ने करीबी रिश्तेदारों से पूछताछ कर दर्ज किए बयान

गिरिबाला-समर्थ ने जेल में कढ़ी खाकर गुजारी पहली रात, दोपहर को खाई करेले की सब्जी

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मॉडल और एक्ट्रेट ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले की जांच कर रही सीबीआई की टीम बुधवार को नोएडा पहुंची। यहां टीम ने ट्विशा की बहन, भाभी, रिश्तेदारों और सहेलियों के बयान दर्ज किए।

इधर, भोपाल की केंद्रीय जेल में बंद ट्विशा की सास, सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा पूर्व जिला उपभोक्ता आयोग अध्यक्ष गिरिबाला सिंह और उनके पुत्र अधिवक्ता समर्थ सिंह की पहली रात जेल में आम विचाराधीन बंदियों की तरह बीती। दोनों को जेल नियमों के तहत सामान्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं और किसी प्रकार की विशेष व्यवस्था नहीं की गई।

दरअसल, सीबीआई ने मंगलवार शाम को कड़ी सुरक्षा के बीच मां गिरीबाला सिंह और बेटे समर्थ को भोपाल के केंद्रीय जेल भेज दिया था। जेल प्रशासन ने गिरिबाला सिंह को विचाराधीन बंदी क्रमांक 71 आवंटित कर महिला वार्ड के ए-खंड में रखा है। सुरक्षा कारणों से उन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। वहीं समर्थ सिंह को विचाराधीन बंदी क्रमांक 1782 देकर पुरुष मेडिकल वार्ड में रखा गया है।

केन्द्रीय जेल में गिरिबाला सिंह और समर्थ के शुरुआती 24 घंटे सामान्य दिनचर्या में बीते। जेल प्रशासन के मुताबिक दोनों का मेडिकल चेकअप किया गया। गिरिबाला ने रात में आराम से पूरी नींद ली, जबकि समर्थ घबराया हुआ नजर आया। वह बैरक की टिप्टी पर करवटें बदलता रहा। प्रवेश के बाद दोनों को रात के भोजन में पकौड़े वाली कढ़ी, रोटी और सब्जी दी गई। जेल प्रशासन ने नियमानुसार उन्हें थाली, कटोरी और गिलास उपलब्ध कराया। बुधवार सुबह चाय के साथ नाश्ते में नमकीन दलिया परोसा गया। दोपहर के भोजन में करेला की सब्जी, चने की दाल, रोटी और चावल दिए गए।

जेल अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल दोनों को किसी विशेष वार्ड में नहीं भेजा गया है और वे अन्य विचाराधीन बंदियों की तरह सामान्य प्रक्रिया के तहत रह रहे हैं। बुधवार को जेल में बंद समर्थ सिंह को ‘द प्रेग्नेंट किंग’ उपन्यास पढ़ते हुए देखा गया। यह उपन्यास पौराणिक पात्र राजा युवनाश्व की कथा पर आधारित है, जिसमें संतान प्राप्ति की इच्छा, एक विशेष औषधि और उसके बाद घटित असाधारण घटनाओं का वर्णन किया गया है।

जेल प्रशासन प्रतिदिन बंदियों की गिनती और उपस्थिति दर्ज करता है। प्रदेश की जेलों में लागू ई-प्रेजेंट सिस्टम के माध्यम से बंदियों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रखा जाता है। इसमें मेडिकल रिकॉर्ड, अपराध की धाराएं, न्यायिक स्थिति और जेल से संबंधित अन्य जानकारियां शामिल रहती हैं। जल्द ही गिरिबाला और समर्थ का रिकॉर्ड भी इस प्रणाली में अपडेट किया जाएगा। यदि कोई विचाराधीन बंदी नियमों के तहत किसी सुविधा की मांग करता है और उसे मंजूरी मिलती है, तो उसका उल्लेख भी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है।

ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए हर पहलू की पड़ताल शुरू कर दी है। दहेज हत्या के आरोप में गिरफ्तार ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को भोपाल की केंद्रीय जेल भेजने के बाद सीबीआई की टीम मंगलवार देर शाम दिल्ली लौट गई थी। बुधवार को टीम नोएडा स्थित ट्विशा के मायके पहुंची, जहां उसकी छोटी बहन, चचेरी बहन, भाभी, करीबी महिला रिश्तेदारों और कुछ सहेलियों के बयान दर्ज किए गए।

सीबीआई यह जानने का प्रयास कर रही है कि ट्विशा और समर्थ का विवाह किन परिस्थितियों में तय हुआ था। साथ ही शादी से पहले दोनों परिवारों के बीच क्या बातचीत हुई और क्या किसी मुद्दे पर दोनों पक्षों में मतभेद थे। जांच एजेंसी विवाह से पहले और बाद की परिस्थितियों को भी खंगाल रही है। सीबीआई विशेष रूप से 12 दिसंबर 2025 को हुई शादी से लेकर 12 मई 2026 तक के घटनाक्रम की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस अवधि में ट्विशा कितनी बार मायके आई, किन परिस्थितियों में आई और उसने अपने ससुराल के माहौल के बारे में परिवार को क्या बताया था। पूछताछ के दौरान यह भी जानने की कोशिश की गई कि ट्विशा के अपनी सास और पति के साथ किन मुद्दों को लेकर विवाद होते थे। क्या उसने दहेज की मांग, मानसिक प्रताड़ना, अपमानजनक व्यवहार या अन्य किसी तरह के उत्पीड़न की शिकायत अपने परिजनों और मित्रों से की थी।

सीबीआई अब उन लोगों के बयान दर्ज कर रही है, जिनसे ट्विशा नियमित रूप से अपनी निजी बातें साझा करती थी। बहन, भाभी, रिश्तेदारों और सहेलियों के बयान दर्ज करने के बाद एजेंसी जल्द ही उसके माता-पिता और भाई मेहर हर्षित शर्मा से भी पूछताछ करेगी।

गौरतलब है कि मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना, मारपीट और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। सीबीआई इन आरोपों की सत्यता की जांच के लिए ऑडियो रिकॉर्डिंग, व्हाट्सएप चैट, मैसेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का भी परीक्षण कर रही है।

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