धनबाद। कोयलांचल की धरती धनबाद अपनी खदानों और औद्योगिक पहचान के लिए जानी जाती है, लेकिन इसी धरती पर एक ऐसा धार्मिक स्थल भी मौजूद है, जहां आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। बीसीसीएल के खास कुसुंडा एरिया-6 स्थित गोंडूडीह ओपी क्षेत्र में लगभग 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजमान मां पहाड़ी काली मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। यह मंदिर बीसीसीएल की ओर से निर्मित वृंदावन ईको पार्क के बीच स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह स्थान धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन सड़क और रख-रखाव के अभाव में आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। स्थानीय लोग वर्षों से इस क्षेत्र को धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग कर रहे हैं।
धनबाद के गोंडूडीह ओपी क्षेत्र अंतर्गत खास कुसुंडा कोलियरी में कोयला उत्पादन के दौरान निकले ओवरबर्डन (ओबी) डंप से लगभग 400 फीट ऊंची पहाड़ी का निर्माण हुआ। बाद में बीसीसीएल ने इस पहाड़ी को विकसित कर वृंदावन ईको पार्क का स्वरूप दिया। हरियाली, प्राकृतिक वातावरण और ऊंचाई से दिखाई देने वाला धनबाद का मनोरम दृश्य इस स्थान को बेहद आकर्षक बनाता है। इसी पहाड़ी की चोटी पर मां पहाड़ी काली का भव्य मंदिर स्थापित किया गया, जो आज पूरे कोयलांचल क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
यह मंदिर धनबाद का संभवतः एकमात्र ऐसा काली मंदिर है, जो जमीन से करीब 400 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को मां काली के दर्शन के साथ-साथ पूरे कोयलांचल का विहंगम दृश्य देखने का सौभाग्य मिलता है। सुबह और शाम के समय यहां का प्राकृतिक नजारा लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता है। चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ियों की ठंडी हवा और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है।
मंदिर में पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्र, काली पूजा, दीपावली और अमावस्या के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर घंटियों की मधुर ध्वनि, मंत्रोच्चार और जयकारों से गूंज उठता है। पुजारियों पंडित संतोष शास्त्री और संजीत कुमार पांडेय का मानना है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना यहां अवश्य पूर्ण होती है। इसी विश्वास के साथ दूर-दूर से लोग परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता की कामना लेकर यहां आते हैं।
लेकिन विडंबना यह है कि इतनी बड़ी धार्मिक और प्राकृतिक धरोहर आज उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। बीसीसीएल की ओर से निर्मित ईको पार्क और मंदिर का समुचित रख-रखाव नहीं हो पा रहा है। सबसे बड़ी समस्या मंदिर तक पहुंचने वाली सड़क की है। पहाड़ी तक जाने के लिए पक्की सड़क नहीं होने के कारण बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे काफी कठिनाई का सामना करते हैं। बरसात के मौसम में रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या प्रभावित होती है।
