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सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, धुर्वा, राँची में ‘अरुणोदय’ पत्रिका लोकार्पण सह आचार्य सम्मान समारोह–2026 का भव्य आयोजन

राँची दिनांक 29 जुलाई 2026 (बुधवार) को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शिशु विकास मंदिर समिति (झारखण्ड) के तत्वावधान में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, धुर्वा, राँची स्थित केशव सभागार में ‘अरुणोदय’ पत्रिका लोकार्पण सह आचार्य सम्मान समारोह–2026 का गरिमामय एवं भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में नव-निर्मित शूटिंग रेंज का उद्घाटन भी संपन्न हुआ।
समारोह के मुख्य अतिथि झारखण्ड के माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री श्रीश देवपुजारी, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख, संस्कृत भारती तथा श्री समीर उरांव, पूर्व सांसद (राज्यसभा), उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के आगमन, राष्ट्रगान, दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। मंचासीन अतिथियों का परिचय एवं स्वागत शिशु विकास मंदिर समिति के सह मंत्री श्री नर्मदेश्वर मिश्र ने कराया, जबकि समिति के मंत्री श्री एस. वेंकट रमण ने कार्यक्रम-वृत्त प्रस्तुत किया। इस अवसर पर समिति के माननीय अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र देव गोस्वामी ने मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार को अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न एवं पौधा भेंट कर सम्मानित किया। तत्पश्चात विशिष्ट अतिथियों का भी अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न एवं पौधा भेंट कर अभिनंदन किया गया।
गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर विद्यालय परिसर में स्थापित नव-निर्मित शूटिंग रेंज का उद्घाटन श्री श्रीश देवपुजारी एवं श्री समीर उरांव के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ। यह शूटिंग रेंज विद्यार्थियों को निशानेबाजी एवं अन्य खेल गतिविधियों में प्रशिक्षण प्रदान करने की दिशा में विद्यालय की एक महत्त्वपूर्ण पहल है।
विद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘अरुणोदय’ का परिचय इसकी संपादक बहन प्रियदर्शी कश्यप ने प्रस्तुत किया। उन्होंने पत्रिका की विषय-वस्तु, उद्देश्यों तथा विद्यार्थियों की रचनात्मक अभिव्यक्ति में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके उपरांत माननीय अतिथियों द्वारा पत्रिका का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर प्रस्तुत एकल गीत ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।
विशिष्ट अतिथि श्री श्रीश देवपुजारी ने अपने संबोधन में महर्षि वेदव्यास के जीवन एवं साहित्यिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने वेदों का संपादन, महाभारत की रचना, वेदांत दर्शन का सूत्रीकरण तथा अठारह पुराणों की रचना कर भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया। उन्होंने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर परंपरा में शिक्षक को ‘आचार्य’ कहा जाता है, जो केवल ज्ञानदाता ही नहीं, बल्कि संस्कारों के संवाहक भी हैं। उन्होंने आचार्यों से नई पीढ़ी के चरित्र निर्माण एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन पर विशेष बल देने का आग्रह किया।
पूर्व सांसद (राज्यसभा) श्री समीर उरांव ने अपने उद्बोधन में कहा कि विद्यालय व्यक्ति-निर्माण, समाज-निर्माण एवं राष्ट्र-निर्माण के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने विद्यालय परिसर में विकसित खेल सुविधाओं एवं नवीन अधोसंरचना की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान शिक्षा के साथ-साथ खेल, व्यक्तित्व विकास एवं राष्ट्रभक्ति के संस्कारों को भी समान महत्व देता है।
समारोह के दौरान विद्यालय परिवार की ओर से वरिष्ठ आचार्यों का सम्मान किया गया। विभिन्न अतिथियों एवं समिति के पदाधिकारियों ने आचार्यों को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर उनके शैक्षिक एवं सामाजिक योगदान का अभिनंदन किया।
मुख्य अतिथि माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार ने अपने उद्बोधन में सभी को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु केवल ज्ञान प्रदान नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र एवं जीवन-दृष्टि का निर्माण भी करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1970 में स्थापित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, धुर्वा आज लगभग तीन हजार विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करते हुए शिक्षा, संस्कार, अनुशासन एवं राष्ट्रभावना का प्रेरणादायी केंद्र बन चुका है।
राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नीति विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नवाचार, अनुसंधान एवं चरित्र-निर्माण को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने ‘अरुणोदय’ पत्रिका को विद्यार्थियों की प्रतिभा एवं सृजनशीलता को अभिव्यक्त करने वाला प्रभावी मंच बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में आत्मविश्वास एवं अभिव्यक्ति कौशल का विकास करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, अनुशासन को जीवन का आधार बनाने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने आचार्यों को संबोधित करते हुए कहा, “शिक्षक ही राष्ट्र के वास्तविक निर्माता हैं और उनके हाथों में देश का उज्ज्वल भविष्य सुरक्षित है।”
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर शिशु विकास मंदिर समिति के अध्यक्ष डॉ नरेंद्र देव गोस्वामी, संरक्षक सदस्य श्री पवन कुमार मंत्री, उपाध्यक्ष श्री सुनील दत्त सिंह, डॉ धनेश्वर महतो, डॉ. संध्या सिंह, श्री अखिलेश्वर नाथ मिश्र, श्री शक्तिनाथ लाल दास, श्री अनिल झा, श्री बलराम उपाध्याय , श्री आशीष नाथ सहदेव, श्री अमित नंदन, श्री रोशन कुमार, श्री ललन कुमार, एवं सुश्री मीना कुमारी सहित समिति के पदाधिकारी, विद्यालय परिवार के आचार्यगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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