⚠️ यह साइट निर्माणाधीन है — बीटा संस्करण

सावन के रंगों में सराबोर हुआ संस्कार भारती का सावन मिलन

रांची। संस्कार भारती, रांची महानगर की ओर से सावन मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कार भारती रांची महानगर के अध्यक्ष रामानुज पाठक एवं शास्त्रीय संगीत साधिका लिली मुखर्जी ने दीप प्रज्वलित कर किया।
इसके पश्चात सुजाता मजूमदार एवं उनकी टीम ने ध्येय गीत प्रस्तुत किया। सुजाता मजूमदार ने कजरी गीतों की श्रृंखला में “कैसे खेलन जइबु सावन में कजरिया, बदरिया घेरे आइल ननदी” प्रस्तुत कर सावन की लोकपरंपरा को जीवंत कर दिया।
लिली मुखर्जी ने “सावन झर लागे रे धीरे-धीरे, दादुर मोर पपीहा बोले, पायल मोरा बाजे रे धीरे-धीरे” कजरी प्रस्तुत की। अवनिन्दर सिंह ने “मोरे राजा केवड़िया खोल, रस के बूंद पड़ी” गाकर श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया। शाश्वती मुखर्जी ने “बादल घिर आए ओ मेरे गुंइयां, जियरा उड़ा जाए” तथा इंदु पाराशर ने भी कजरी की प्रस्तुति दी।
प्रसिद्ध नृत्यांगना गार्गी शोम ने नृत्य के माध्यम से शिव वंदना एवं सावन की मनोहारी प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की।

कार्यक्रम में आयोजित कवि सम्मेलन में सुरिंदर कौर नीलम ने “रिमझिम की फुहार, छम-छम बूंद की झंकार, सोंधी माटी का दरबार, सावन आया है” सुनाकर सावन की सोंधी अनुभूति को शब्द दिए। आशुतोष प्रसाद ने “मेरी कल्पनाओं के क्षितिज पर उगता हुआ वह सूर्य है, जिसकी रोशनी में हर कविता स्वयं को अमर समझने लगती है” प्रस्तुत की।
कल्पना कुमारी ने देशभक्ति की रचना “हाथ में तिरंगा लिए सीमा पर वही तैनात रहते हैं, वतन के वास्ते यारों बड़े जज्बात रखते हैं” सुनाई।
राकेश रमण ने सावन के रंग में रंगे शहर का चित्र अपनी कविता में उकेरा। सदानंद यादव ने “चलो चलो देवघर नगरिया हो भैया, बाबा दुवरिया ना”, संगीता यादव ने “आया आषाढ़ का महीना, भींगा धरती का कोना-कोना” तथा संगीता सहाय ने “छज्जे पर मोर बैठे, पपीहा पीहू-पीहू बोले” प्रस्तुत किया।
किरण सिंह ने मां-बेटी के भावनात्मक रिश्ते को केंद्र में रखते हुए “सुनो बिटिया, तुम्हें देख देखूंगी अपना बचपन, तुम्हारी खुशी में जी लूंगी अपना सावन” सुनाया। विजय खोवाला ने “ताली बजा के नमः शिवाय, हम भी कहें और तुम भी कहो” भजन के माध्यम से भक्ति का वातावरण बनाया। खुशबू बरनवाल ने इतिहास पर सवाल उठाती रचना “जो हमने इतिहास बनाया, असल बात को छुपा लिया और कायर को ही छाप दिया” प्रस्तुत की। रजनी शर्मा ने “सावन में बोले छै कोयलिया, त जियरा में हुक उठे छै” सुनाया, जबकि अनुराधा अनु ने अपनी ग़ज़ल प्रस्तुत की।
इस अवसर पर संस्कार भारती रांची महानगर की महामंत्री शशिकला पौराणिक, कवयित्री कविता रानी सिंह, दीपमाला, मिथिलेश पाठक, कुमकुम गौड़, अशोक गौड़, वीणा चंद्रा, मधुरेश चंद्रा, शिवपूजन पाठक, कामिनी पाठक, अनूप मजूमदार तथा वर्षा ऋतुराज सहित अनेक साहित्य एवं कला प्रेमी उपस्थित थे।
धन्यवाद ज्ञापन शशिकला पौराणिक ने किया। राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

Add a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सबसे महत्वपूर्ण खबरों से अपडेट रहें

सब्सक्राइब बटन दबाकर, आप पुष्टि करते हैं कि आपने हमारी गोपनीयता नीति और उपयोग की शर्तें पढ़ी हैं और सहमत हैं गोपनीयता नीति and उपयोग की शर्तें