⚠️ यह साइट निर्माणाधीन है — बीटा संस्करण

पलामू की जीवनरेखा नदियों को मिलेगा नया जीवन, स्वच्छता की तैयारी

पलामू। पलामू जिले से होकर बहने वाली उत्तरी कोयल, सोन, अमानत, बटाने, औरंगा और भेलवा समेत प्रमुख नदियों को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत प्रशासन नदियों की वर्तमान स्थिति का विस्तृत सर्वे कर रिपोर्ट तैयार कर रहा है। यह रिपोर्ट राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।

गांधी जयंती के अवसर पर प्रशासन ने नदी स्वच्छता अभियान की शुरुआत भी कर दी है। मेदिनीनगर में कोयल और अमानत नदी के संगम स्थल पर सफाई अभियान चलाने के साथ पौधारोपण किया गया। इसके अलावा नदियों में गिरने वाले गंदे पानी, कचरे और सीवेज की स्थिति का भी आकलन किया जा रहा है।

प्रशासन की ओर से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2024 के अनुपालन की समीक्षा की जा रही है। नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है, ताकि नालियों और शहरों का गंदा पानी सीधे नदियों में न पहुंचे। अभियान और सर्वे से जुड़े अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने गुरूवार को बताया कि सुप्रीम कोर्ट में भोपाल म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से संबंधित मामले के तहत पलामू की नदियों की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जो राज्य के माध्यम से भारत सरकार तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि नदियों को स्वच्छ रखने के लिए ठोस योजना पर काम किया जा रहा है और कचरा प्रबंधन नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। नदियों को प्रदूषित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की भी योजना बनाई जा रही है।

कचरा और सीवेज बना नदियों के लिए बड़ी चुनौती

पलामू की करीब 15 से 20 लाख आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन नदियों पर निर्भर है। इसके बावजूद कई जगहों पर नदियों में कचरा, नाली का पानी और सीवेज गिराया जा रहा है। मेदिनीनगर और रेहला क्षेत्र का कचरा कोयल नदी के किनारे डंप किए जाने की शिकायत है, जबकि हुसैनाबाद क्षेत्र का कचरा और सीवेज सोन नदी में पहुंच रहा है। भेलवा नदी में भी बिश्रामपुर क्षेत्र का कचरा और नाली का पानी जाने की बात सामने आई है। नदी किनारे अतिक्रमण भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। मेदिनीनगर नगर निगम के गठन के वर्षों बाद भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सकी है।

नदियों का पलामू से गहरा जुड़ाव

उत्तरी कोयल नदी गुमला के कूटवा गांव से निकलती है और करीब 260 किलोमीटर की दूरी तय करती है। इसका लगभग 100 किलोमीटर हिस्सा पलामू से होकर गुजरता है। सोन नदी जिले के उत्तरी हिस्से से बहते हुए हैदरनगर और हुसैनाबाद के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है। वहीं, करीब 210 किलोमीटर लंबी अमानत नदी पलामू के पूर्वी हिस्से से पश्चिम की ओर बहते हुए कोयल नदी में मिलती है। पांकी, लेस्लीगंज, तरहसी और पाटन क्षेत्र के लिए भी यह नदी महत्वपूर्ण है।

नदी बचाने में जनभागीदारी जरूरीः पर्यावरणविद् कौशल

पर्यावरणविद् कौशल किशोर जायसवाल ने प्रशासन की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि नदियों को बचाने के लिए सिर्फ सरकारी प्रयास काफी नहीं हैं। इसमें आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। वहीं, मेदिनीनगर निवासी गुड्डू खान ने नदी किनारे कचरा डंप किए जाने और अतिक्रमण पर चिंता जताते हुए इसे नदी के लिए गंभीर खतरा बताया।

प्रशासन की पहल, सीवेज ट्रीटमेंट की तैयारी और कचरा प्रबंधन को लेकर प्रस्तावित कार्रवाई से पलामू की नदियों के पुनर्जीवन की उम्मीद जगी है। अब देखना होगा कि तैयार होने वाली रिपोर्ट के बाद योजनाएं जमीन पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती हैं।

Add a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सबसे महत्वपूर्ण खबरों से अपडेट रहें

सब्सक्राइब बटन दबाकर, आप पुष्टि करते हैं कि आपने हमारी गोपनीयता नीति और उपयोग की शर्तें पढ़ी हैं और सहमत हैं गोपनीयता नीति and उपयोग की शर्तें