नई दिल्ली। भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत की उम्मीद लगाए याचिकाकर्ता को फिलहाल झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने मामले में दायर जनहित याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को पहले सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष याचिका का उल्लेख करने का निर्देश दिया।
जानकारी के अनुसार, यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी की ओर से 21 जून 2026 को दाखिल की गई थी। याचिका में भरत भूषण तिवारी की मुठभेड़ को कथित तौर पर फर्जी बताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
याचिका में मामले की जांच सीबीआई से कराने, घटना में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और निष्पक्ष जांच के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है।
सोमवार को न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने तत्काल सुनवाई की मांग रखी गई थी। हालांकि, अदालत ने तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पहले रजिस्ट्रार के समक्ष मामले का उल्लेख करने को कहा।
बताया जा रहा है कि भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं और स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी मामले के आरोपों या मुठभेड़ की सत्यता पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
