देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत गीत ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा’ आज भी हर भारतीय के मन में राष्ट्रप्रेम और गौरव की भावना जगाता है। इस कालजयी झंडा गीत के रचयिता स्वतंत्रता सेनानी और कवि श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ की पुण्यतिथि 10 अगस्त को मनाई जाती है। वर्ष 1977 में इसी दिन उनका निधन हुआ था।
श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ का जीवन देशसेवा और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति समर्पण से जुड़ा रहा। उन्होंने अपनी लेखनी को राष्ट्रीय चेतना जगाने का माध्यम बनाया। उनके रचे गीतों और कविताओं में देशभक्ति, स्वतंत्रता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।
‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में शामिल है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में इस गीत ने लोगों में राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने का काम किया। तिरंगे को केंद्र में रखकर रची गई इसकी पंक्तियां स्वतंत्रता सेनानियों और आम लोगों में जोश भरती थीं।
श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ केवल कवि ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले राष्ट्रवादी व्यक्तित्व भी थे। उन्होंने सामाजिक जागरूकता और देश की स्वतंत्रता के लिए अपने लेखन और कर्म, दोनों के माध्यम से योगदान दिया।
