हिंदी को दैनिक जीवन में शामिल करने की जरूरत : मनीष मिश्रा
रांची। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, धुर्वा में 19 सितंबर को केशव सभागार में हिन्दी पखवाड़ा के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि एवं वक्ता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक मनीष कुमार मिश्रा थे।
इस अवसर पर शिशु विकास मंदिर समिति के सदस्य डॉ. धनेश्वर महतो ने मुख्य अतिथि का अंगवस्त्र प्रदान कर स्वागत किया, जबकि श्री आशीष नाथ शाहदेव ने विद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘अरुणोदय’ भेंट की।
विद्यालय के आचार्य पुरुषोत्तम जी ने कहा कि हिन्दी राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। आचार्य राजेश पाठक ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया। आचार्या सविता कुमारी ने दैनिक जीवन में हिन्दी के प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं आचार्य प्रदीप कुमार ने ‘हिंदी है भारत की बोली’ कविता का पाठ किया।
मुख्य वक्ता मनीष कुमार मिश्रा ने कहा कि हिन्दी अब केवल हिन्दी पखवाड़े या संगोष्ठियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इन सीमाओं से आगे बढ़ चुकी है। उन्होंने चिकित्सा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी क्षेत्रों के पाठ्यक्रम हिन्दी में तैयार करने तथा नई शब्दावली विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि हिन्दी में रोजगार और करियर की असीम संभावनाएं हैं। लोगों को हिन्दी को लेकर किसी तरह की हीन भावना नहीं रखनी चाहिए, बल्कि अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिन्दी में अन्य भाषाओं के शब्दों को आत्मसात करने की अद्भुत क्षमता है। भाषा को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त साहित्य का सृजन और बच्चों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। उन्होंने विद्यालय और समाज में हिन्दी के अनुकूल वातावरण बनाने पर भी जोर दिया।
समिति के सदस्य आशीष नाथ शाहदेव ने हिन्दी के राजभाषा स्वरूप के निहित अर्थ को समझाया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन उच्चतर माध्यमिक खंड के प्रभारी राकेश पांडेय ने किया। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य ललन कुमार, उपप्राचार्या मीना कुमारी सहित सभी आचार्य-आचार्या उपस्थित रहे।
