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आईना वही रहता है चेहरे बदल जाते हैं समय समय की बात

वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गई,

पश्चिम सिंहभूम/ चक्रधरपुर का ऐतिहासिक किला राजवाड़ी को महाविद्यालय बनाने के लिए जो संवेदक थे वो सपरिवार बयालीस वर्षों बाद इसका अवलोकन करने चक्रधरपुर पहुंचे और काफी आत्म विभोर भी हुए । चक्रधरपुर का ऐतिहासिक धरोहर राजवाड़ी किला जो पूरे क्षेत्र का शान था इसके ध्वस्त होने की स्थिति में इसे तत्कालीन हजारीबाग के राज परिवार ने इसे चक्रधरपुर के सी जे पटेल को दे दिया बाद में सी जे पटेल के द्वारा इसे जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य जो रांची के तत्कालीन विधायक ननी गोपाल मित्रा को महाविद्यालय के लिए दे दिया। ध्वस्त होने के कगार पर इस राजमहल को तोड़ने और सुरक्षित रखने के लिए जमशेदपुर के संवेदक बैद्यनाथ पांडेय और उनके पुत्र अनंत कुमार पांडेय को इसकी जवाबदेही दी गई जिसकी जवाबदेही अनंत कुमार पांडेय के देखरेख में कुशलता पूर्वक किया गया और वर्तमान समय में जवाहरलाल महाविद्यालय इस राजमहल में स्थापित है। बयालीस वर्षों के पश्चात अनंत पांडेय सपरिवार इस स्थल और महाविद्यालय को देखने जमशेदपुर से चक्रधरपुर पहुंचे और काफी भावविभोर हुए। श्री पांडेय की पुत्री आभा रश्मि यहां पहुंच कर काफी हर्षित हुई और कहा कि उनके पूज्य दादा जी और पिता अनंत पांडेय के अथक परिश्रम और प्रयास से राजवाड़ी किला अब शिक्षा का मंदिर बन चुका है जिसमें ज्ञान प्राप्त कर कई छात्र महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं।वह अपने पिता के उपलब्धि पर काफी हर्षित और गौरवान्वित भी है और कहती है –
इनके प्रयास से हो पाया है शिक्षा के क्षेत्र का मंदिर का निर्माणपश्चिम सिंहभूम/ चक्रधरपुर का ऐतिहासिक किला राजवाड़ी को महाविद्यालय बनाने के लिए जो संवेदक थे वो सपरिवार बयालीस वर्षों बाद इसका अवलोकन करने चक्रधरपुर पहुंचे और काफी आत्म विभोर भी हुए । चक्रधरपुर का ऐतिहासिक धरोहर राजवाड़ी किला जो पूरे क्षेत्र का शान था इसके ध्वस्त होने की स्थिति में इसे तत्कालीन हजारीबाग के राज परिवार ने इसे चक्रधरपुर के सी जे पटेल को दे दिया बाद में सी जे पटेल के द्वारा इसे जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य जो रांची के तत्कालीन विधायक ननी गोपाल मित्रा को महाविद्यालय के लिए दे दिया। ध्वस्त होने के कगार पर इस राजमहल को तोड़ने और सुरक्षित रखने के लिए जमशेदपुर के संवेदक बैद्यनाथ पांडेय और उनके पुत्र अनंत कुमार पांडेय को इसकी जवाबदेही दी गई जिसकी जवाबदेही अनंत कुमार पांडेय के देखरेख में कुशलता पूर्वक किया गया और वर्तमान समय में जवाहरलाल महाविद्यालय इस राजमहल में स्थापित है। बयालीस वर्षों के पश्चात अनंत पांडेय सपरिवार इस स्थल और महाविद्यालय को देखने जमशेदपुर से चक्रधरपुर पहुंचे और काफी भावविभोर हुए। श्री पांडेय की पुत्री आभा रश्मि यहां पहुंच कर काफी हर्षित हुई और कहा कि उनके पूज्य दादा जी और पिता अनंत पांडेय के अथक परिश्रम और प्रयास से राजवाड़ी किला अब शिक्षा का मंदिर बन चुका है जिसमें ज्ञान प्राप्त कर कई छात्र महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं।वह अपने पिता के उपलब्धि पर काफी हर्षित और गौरवान्वित भी है और कहती है – इनके प्रयास से हो पाया है शिक्षा के क्षेत्र का मंदिर का निर्माण

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